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गुरुवार, 21 नवंबर 2019

सोच कर बताइए आपके लिए,हमारे लिए मोटिवेशन सही है या नहीं |अगर नहीं तो कैसे?

Think and tell whether Motivation is right for you or not. If not, how?


         मेरा मानना है कुछ हद तक मोटिवेशन सही भी है और कुछ हद तक मोटिवेशन गलत भी | अगर आप सही तरीके से कमाते हैं ,खाते हैं, पीते हैं तो पॉपुलेशन बढ़ता है, गंदगी भी बढती है, फिर बिमारियों का लफरा॥ क्या यह सब चीजें नहीं बढ़ती है, बढ़ती ही है तो अगर समझना है यह मोटिवेशन सही है या गलत| दोनों ही हो सकता है| चॉइस आपकी है कि आप किस तरीके से अपने आप में बदलाव लाते हैं| कुछ लोग संभालते हैं, कुछ लोग बिगड़ते है।बारिश होती है कूछ लोगों को परेशानियां भी तो होती है  कुछ लोगों नही। English मे भी है।
         I believe that to some extent Motivation is right and to some extent Motivation is also wrong. If you earn properly, eat, drink, then the population increases, the dirt also increases, then the illness of illness increases. Do not all these things grow, they grow, so if you want to understand whether this motivation is right or wrong. Both can happen. The choice is yours in how you make changes in yourself. Some people handle, some people deteriorate. It is difficult that some people have problems even some people do not.
         यह सच है कि मैं जो काम कर रहा हूं वह कुछ लोगों को यह टाइम पास लग रहा होगा या कुछ लोगों को मेरी बातें अच्छी तरीके से समझ आ गई होगी। ====It is true that the work that I am doing may be taking some time to pass or some people may have understood my things well.
Vikrant kumar@
            कहते हैं” कहने में कुछ नहीं लगता; क्या आप खाना बिना खाए हुए कहते हैं,, नहीं” आप खाना खाते हैं।खाना खाकर आप की एनर्जी वॉइस कन्वर्ट करते हैं। फिर जाकर आप कुछ बोलते हैं,कुछ लोग कहते हैं, चमड़े का मुंह है बोल दिया तो क्या हुआ? और कुछ कहते हैं ,नहीं जो बोला सही बोला॥ इनमें दो बातें होती है कुछ कहेंगे सही कहा कुछ कहेंगे गलत ॥ लेकिन” अपने आप को समझने से ही बदलाव आ सकती हैं। उसके बाद अपने आप में बदलाव लाने की कोशिश को ही आप अपने परिवार में उतारेंगे, तभी जाकर आप की कोशिश सफल होगी।==They say “It doesn’t take anything to say; Do you say without eating food, don’t”. You eat food. Eating food converts your energy voice. Then you go and say something, some people say that it is the mouth of leather. And some say, no one said right. There are two things in this, some will say right, some will say wrong. But “Changes can be made only by understanding yourself. After that you will try to change yourself in your family, only then will your efforts succeed.
            कहेंगे कि आप कुछ बन जाओ,आप कुछ बड़े बन जाओ या सभी को बड़े बनना चाहिए।अपनी मंजिल की तलाश करो ! आप अपने बेटे को भी यही राय देंगे,मैं भी दूंगा। मैं नहीं चाहता कि हमारा देश, हमारे लोग सभी आगे नही बढ़े लेकिन आगे बढ़ने के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारी को भी समझें ।===You will say that you should become something, you should become something big or everyone should become big. Seek out your destination! You will give the same opinion to your son, I will also. I do not want our country, our people not all to move forward, but as we move forward, we should also understand our responsibilities.
              पता है आपको, मैंने पहला वीडियो यूट्यूब पर डाला था तो उसमे हमने thumbnale लगाया था कि मुझे कुछ करना ही नहीं है इसीलिए मैं बैठा रहता हूं | यह सुनकर मेरे घरवाले मेरे ऊपर बहुत हंसी उड़ाई लेकिन मेरे इस जज्बात को किसी ने समझ ना पाई कि जब यह कंटेंट लिख सकता है कि मुझे कुछ करना ही नहीं इसीलिए मैं बैठा रहता हूं,अगर मुझे करना है तो मैं हमेशा ही लगा रहूँगा,यह इन लोगो को दिखा नही। इसीलिए मैं रात हो, दिन हो, सुबह हो, शाम हो इन सब चीजों को देखता नहीं और मैं अपने काम में लगा रहता हूं |===You know, I put the first video on YouTube, so we put a thumbnale in it that I do not have to do anything, that is why I remain seated. Hearing this, my family laughed a lot at me, but no one could understand my feeling that when I can write this content that I have nothing to do, that is why I am sitting, if I have to, I will always keep it, Inlogo did not know. That is why I do not see all these things when it is night, day, morning, evening, and I continue in my work.

शनिवार, 16 नवंबर 2019

आदमी कि मौत नही होती

आदमी कि मौत नही होती 
 🐚🐚🐚

     आदमी अपनी मौत खुद मांगता है,जी हाँ मैं विक्रान्त कुमार आप लोगो के बीच कुछ सच्ची घटना को ले कर।

                मनुष्य अपने हि किसी ग़लती के कारण से अपनी मौत चून लेता है,अब मेरे बचने कि उम्मीद कम है,यह मान कर वो अपनी कहानी के सारे कायनात खुद लिखता रहता है।
               कुछ लोग कहते है कि भगवान है हि नही,कुछ लोग कहते है कि भगवान है,
                              तो मेरा मानना है कि जो लोग मानते है कि भगवान है,छोटी-मोटी ग़लती को बुरा बना कर अपनी ग़लती का पश्चाताप ही करते है,और मानते है कि भगवान मुझे कभी माफ़ नही करेगा।इसीलिए पश्चाताप के आगोश मे डूब जाते है ।

            और जो लोग मानते है कि भगवान है हि नही तो वे लोग बरे आदमी बनने के लिये ऐसे - ऐसे कदम उठाने लगते है कि वो अपने आप को हि भगवान,खुदा मान लेते है , और फिर लास्ट मे होता वही है।     विनाश.........

विनाश के अलावा उसके ज़िन्द्गी मे कुछ नही रहता वह अपनी विनाश का रास्ता खुद ही चुन लेता है ।

      और कुछ ऐसे भी होते है जो अपने आप को इस जहाँ का एक हिस्सा मान कर हमेशा-हमेशा के लिये इस जहाँ के  बनकर रहना चाहते है,और अपनी इस करामत से दुनीया के लोगो को अपने जैसा बनने कि हिदायत भी देते है ,


                 तो मेरे कहने का मतलब साफ है कि आदमी अपनी कहानी खुद लिखना चाहता है।

                अब आपको खुद सोचना समझना है कि आपकी कहानी कौन लिखे ?

       मैं फ्री बैठा हुं बोलेंगे तो मैं आपकी कहानी लिख दुंगा,लेकिन एक सर्थ पर! जो मैं लिख दुंगा चाहे जो भी लिख दु !!वो तुम्हें पुरी करनी परे..गी ॥ चाहे तुम हस के करो या रो के !!


            भाई   एक बात बोलू तुम जो चाहो वैसी ही कहानी लिख डालो जैसा तुम बनना चाहते हो , लेकिन जो लिखना एक दम सोच समझ के पुरी ज़िंदगी कि कहानी लिखने जा रहे हो ,पहले कभी ट्राय नही किया है,तो एक दो बार पहले ट्राय कर लेना क्योंकि ज़िदगी का सवाल है ।
               एक बात बोलू तुम लिख लोगे ना तो यार मेरा भी लिख देना क्योंकि यार मेरे पास उतना टाईम नही जो मैं अपनी कहानी खुद लिखु,अगर मैं अपनी हि ज़िदगी कि कहानी लिखुन्गा , तो आपके लिये इतनी अच्छी-अच्छी कहानी कहा से लाउंगा और कहा से लिखुन्गा ।
              लो जी ये तो वही बात हुई ना रंग भी खुद हि ख़रीद लो और अपने ही चेहरे पर खुद हि लगा लो ,,,
ऐसा भी कोई करता है  क्या  ?
                      
        चलो मेरी छोरो अपने कहानी जब भी लिखना तो सबसे पहले कुछ लोगो से राय ले लेना । लोगो के राय लेने से सभी काम आसान हो जायेंगे और आपको अपनी मंज़िल मिल जियेगी,
                               मेरा एक रिक्वेस्ट है कि जिन लोगो ने अपनी कहानी खुद लिखा है वो दूसरों को मदद ज़रुर करे ।




बाय-बाय 👆




          Ji  जाते-जाते एक बात और मेरा यह Blog कैसा लगा ? मुझे पता है जैसा होना चाहिये वैसा नही है ,लेकिन आपका जवाब मैं अपने इस पेज के नीचे देखना चाहता हूँ ।
                                अगले पेज को मैं आप लोगो के लिये और अच्छा बनाने कि कोशिश करुँगा ।

                        

मंगलवार, 12 नवंबर 2019

प्रैंक की नई-नई आइडिया , जितनी चाहो उतने पैसे कमा लो l

मैं आप लोगों के साथ कुछ ऐसे फोटो शेयर कर रहा हूं जो प्रूफ दे सकता है कि ऐसे वीडियो की मांग है अभी के मार्केट में ऑन यूट्यूब, ऑन फेसबुक, ऑन Tick Tock , डू यू अंडरस्टैंड l

V. K mobile, Screen short video.
और भी कई सारे आईडिया है मैं आपको शेयर कर रहा हूं l
credit: third party image referenceV. K mobile, Screen short video
मैं आपको डिटेल में बताता हूं नंबर वार्ड नंबर करके l
गांव की लड़कियों के साथ प्रैंक वीडियो बनाओ l जो प्रैंक का मतलब नहीं जानती हो ..तो मजा आए l Follow me 
  • बूढ़े अंकल के साथ मजे करो l उन्हें बोलो कि अगर वह आपको मिल जाएगी तो आपको कैसा लगेगा l

  • काफी सुंदर दिखने वाली लड़कियों के साथ प्रैंक वीडियो बनाओ जिससे लोगों को मजा आ जाए l

  • हिंदू और मुस्लिम भाई-भाई हो जाए ऐसा कुछ प्रैंक वीडियो बनाओ जिससे दुनिया खुशी से झूम उठे l

  • कहीं अगर झगड़ा हो रहा है तो उन्हें पूरी तरीके से शांत कर दो और इससे बड़ी बात क्या हो सकती है l

चलिए और भी कई सारे आइडिया को लेकर हम दूसरी बार फिर से हाजिर होंगे बने रहिए हमारे साथ में आप लोग का प्यार है जो हमें और हमारे देश को आगे की ओर ले जाने में सबका साथ सबका विकास सबका हाथ की जरूरत की मांग करता hai .
credit: third party image referenceV. K mobile, Screen short video

सोमवार, 21 अक्टूबर 2019

सभी आदमी अकेला है, एक कंधों पर उठाया अपना ठेला है।
बोल रहा यह संसार का मेला है, इसमें चलना आपको अकेला है ।


आप भी अपना कम्प्यूटर उठाये या ठेला क्यो की चलना है अकेला।




        अगर आप पेंसिल से गंदे अक्षर लिखे हो, तो पेन से भी गंदे ही अक्षर लिखोगे।। अगर आपने सर को नोचना शुरू किया तो, बदन को भी नौचौगे ही, ये सब साईकिल है।
                 अगर आपने कान में उंगली डाली तो नाक में भी उंगली डालेंगे ही// तो अगर आप ठेला चलाना शुरु किए हो तो, आगे जाकर रिक्शा, टेंपो, टुकटुक भी चला सकेंगे, तो अगर आपने computer चलाया है या चला रहे हैं तो .............




      आगे जाकर सुपरकंप्यूटर भी ............ अगर आपने बड़ा सोचा है तो उससे भी आगे बढ़ा करेंगे।


ha ha ha , उलझने बहुत है , अपुचुनीटी भी बहुत है।

no-5🔃 हजारों बिजलियॉ टूट परी 🔃 

              गुरू के लिए आत्मा को ऊपर  no-7 ले जाना मुश्किल नही,लेकिन उचित अभ्यास के बिना ऊपर ले जाने से आत्मा का नुकसान होता है ।एक रेश्मी कपड़े को ,जो कांटेदार झारियो पर फैला हुआ है ,एकाएक खींचा जाये तो वह फटकर टुकड़े -टुकड़े हो जायेगा ।उसी तरह आत्मा को ,जो कर्मो के कांटो मे फंसी हुई है और शरीर के रोम-रोम मे फैली हुई है, गुरू के प्रेम द्रुरा धीरे-धीरे निर्मल करना चाहिए ।  no-10

शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

आपके दिल की बात !

🎄 बबूल से मनुष्य जन्म 🎄

"कृपया चिंता ना करें,हर कदम पर आपकी मदद मार्गदर्शन और रक्षा के लिए सतगुरु हमेशा आपके साथ हैं।आप उनके प्रति सचेत हो,जाएं और उनकी लगातार मौजूदगी का अनुभव करें", विश्वास,प्रेम और नम्रता के साथ बराबर भजन सुमिरन करते रहे ।
      एक अभ्यासी सत्संगी ने एक पेर की ओर इशारा करते हुए बड़े महाराज जी से पूछा,"अच्छे कर्म करने से क्या यह पेड़ भी मनुष्य देह प्राप्त कर सकता है ?
5,मेरा mail Id 5 मे है | 
 ( उत्त्रराखण्ड,=जब मैं पेपर देने गया था,कुछ समय घूमने भी मिला था।वही फोटो शेयर कर रहा हुं ।)
        उन्होंने उत्तर दिया,"यह ठीक है कि 8400000 लाख योनियों का सारा चक्कर पूरा करके जीव को मनुष्य देह मिलता है, परंतु सतगुरु के पास नाम की अमोलक शक्ति होती है। अगर वह किसी पेड़ का फल खा ले, उसकी छाया में बैठ जाए या किसी जानवर, जैसे की घोड़े,की सवारी कर ले, तो उसे मनुष्य देह देने की दया कर देते हैं।"
5 मेरा mail Id है | 

      उन्होंने फिर बताया कि 40 वर्ष पहले,एक बाप-बेटा, स्वामी जी महाराज के शिष्य थे। उन दिनों प्लेग की बीमारी फैल जाने से लड़की की मृत्यु हो गई। जब पुत्र भी मृत्यु के करीब था तो पिता रोने लग गया।
                             पुत्र ने पूछा,"पिताजी, आप रोते क्यों है?" पिता ने उत्तर दिया,"तुम मेरे इकलौते बेटे हो । तुम मर रहे हो इसलिए मैं रो रहा हूं। पुत्र ने शांति से उत्तर दिया,"पिता जी, मैं मर नहीं रहा बल्कि जीने जा रहा हूं।मेरे अंदर का पर्दा उठ गया है और मुझे अपने पिछले जन्म के बारे में पता चल गया है।मैं उस समय एक बबूल का पेड़ था।किसी सत्संगी ने मेरी टहनी  की  दातुन बनाकर स्वामी जी महाराज की सेवा में समर्पण कर दी।
उसके फलस्वरूप मुझे यह मनुष्य देह मिली है, परंतु मेरी बुद्धि जा रही है। अब मेरा किसी अच्छे परिवार में जन्म होगा और मैं परमार्थ का अभ्यास करूँगा।

                         बड़े महाराज ने बताया कि यह सच्ची घटना है परंतु इसी घटनाएँ बहुत कम होती है। उसी अभ्यासी सत्संगी ने दोबारा फिर पूछा, "अच्छा! पहले रूह वृक्ष में आती है,फिर किरे में और फिर?"
मेरा mail Id 2 मे है | 
           बड़े महाराज जी ने उत्तर दिया,"फिर पक्षियों में, इसके बाद पशुओं में और सबसे आखिर में मनुष्य जन्म मिलता है। नियम तो यही है कि सारा 84 का चक्कर भोगकर करोड़ों वर्ष बाद मनुष्य जन्म में आए।"उन्होंने बताया कि वह उन भाग्यशाली जीवों की बात कर रहे हैं कि जिनका संतों के साथ संबंध बन जाता है; वह किसी भी योनि में हो, उनको मनुष्य जन्म मिल सकता है। चाहे उनको कर्मों का बोझ अभी भारी क्यों ना हो, मगर आसानी तो हो जाती है।

          मुक्ति नाम में है। बिना नाम के जीव ऊपर सचखंड में नहीं जा सकता। नाम की कमाई सिर्फ मनुष्य शरीर में ही हो सकती है। अगर आप कहें कि पैरों, पक्षियों, पशुओं को ले जाए तो यह नहीं हो सकता, क्योंकि बिना मनुष्य शरीर के नाम कहीं जब सकते और बिना नाम की कमाई किए आंतरिक ज्ञान नहीं हो सकता और बिना आंतरिक ज्ञान या अनुभव के मुक्ति नहीं मिल सकती ।


आप भी हमे भेज सकते है ,कहानी , सतसंग की बात,अपने भगवान की बात,जो आपने अपने जिंदगी मे देखा है ।

मेरा mail Id 3 मे है | 

रविवार, 8 सितंबर 2019

आपके सामान से होगी आपकी पहचान तब जाकर मिलेगा सम्मान

✴️✴️ हीरे का मोल ✴️✴️


       मेवाड़ की रानी मीराबाई 15वीं शताब्दी के मशहूर संत गुरु रविदास जी की शिष्य थी । मीराबाई की सखियां-सहेलियाँ गुरु रविदास जी की  नीची जाति पर नाक मुंह चढ़ाती थी। वह मीराबाई को ताने देती थी कि तू खुद शाही महलों में रहती है, पर तेरा गुरु जूते सी कर बड़ी मुश्किल से गुजारा करता है।

                   मीराबाई को इस बात का बहुत दुख हुआ। उसके हृदय में सतगुरु रविदास जी की के लिए सच्चा प्रेम और आदर था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह करे तो क्या करें । अंत में एक दिन उसने हीरो के डिब्बों में से एक कीमती हीरा निकाला ताकि गुरु रविदास जी को दे सके,  जिसे बेचकर उन्हें काफी धन मिल सकता था। वह हीरा लेकर गुरु रविदास जी के पास चली गई । उसने माथा टेक कर और हाथ बाँधकर अर्ज की," गुरु जी, मुझे आपकी गरीबी देख कर बहुत दुख होता है और लोग मुझे ताने देते हैं कि
तेरा गुरु इतना ग़रीब है। आप यह हीरा स्वीकार कर लें और इसको बेचकर सुंदर सा घर बना लें ताकि आप खुद की जिंदगी गुजार सकें ।"

                          गुरु रविदास जी उसी तरह जूते काटते हुए बोले, "बेटी, मुझे जो कुछ मिला है, कुंड के पानी और जूते गांठने से मिला है ।अगर तुझे लोक-लाज का डर है तो घर में बैठकर ही भजन-सुमिरन कर लिया कर, मेरे पास आने की कोई जरूरत नहीं। यह हीरा मेरे किसी काम का नहीं। चाहे लोग मुझे ग़रीब समझते हैं पर मुझे गरीबी में ही आनंद है। मुझे दुनिया की किसी नाशवान वस्तु की जरूरत नहीं।"

           
                 मीराबाई हर हालत में गुरु रविदास जी को हीरा देना चाहती थी । वह बहुत देर तक मिन्नतें करती रहे, पर गुरु जी ने एक ना सुनी। अंत में निराश होकर मीराबाई कहने लगी, "गुरु जी, मैं हीरा आपकी कुटिया की छत में छोड़ जाती हूं। जब जरूरत पड़े, आप निकाल लेना ताकि आपका जीवन सुखमय हो जाए।"

मैं Online Business भी करता हूँ ,आप शांति से इस पेज को भी देख सकते है।
                                            यह कहकर मीराबाई अपने महल में चली गई । इस बात को कई महीने बीत गए। जब वह फिर गुरु रविदास जी के दर्शन जी को गई तो यह देखकर हैरान रह गई कि वह अब भी गरीबी की हालत में जूते काट रहे थे। उसने आदर पूर्वक माथा टेक कर कहा, "गुरु जी, मैं बड़े प्यार और आदर से आपके लिए हीरा छोड़ गई थी, आपने उसका फायदा क्यों नहीं उठाया ?
                                          गुरु रविदास जी बोली," बेटी, मैंने हीरे का क्या करना है। मुझे परमात्मा ने नाम का वह धन बख्शा है जिसका हिसाब लगा पाना असंभव है। तुम वापस जाती हुई हीरा साथ ले जाना ।"

                         मीराबाई ने छत पटोली तो हीरा वहीं पड़ा मिला जहां वह रख कर गई थी। गुरु रविदास जी ने हीरा की ओर ध्यान ही नहीं दिया था । यह देखकर मीराबाई को अपने गुरु की बड़ाई का सच्चा ज्ञान हो गया और उसे एहसास हो गया कि उसकी सतगुरु किस अपार रूहानी दौलत के मालिक हैं। वह प्रेम, श्रद्धा और नम्रता के  साथ सतगुरु के चरणों में 
 गिर पड़ी ।