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सोमवार, 30 दिसंबर 2019

जब वह बाजार जाता तो एक वैश्या..........

आग का मोल 
            कहा जाता है कि शेख फरीद का एक शिष्य बहुत नेक - पाक था। जब वह बाजार जाता तो एक वैश्या उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए उससे मजाक किया करती । वह बेचारा दूसरी ओर ध्यान कर लेता । ज्यो-ज्यो वह दूसरी तरफ ध्यान करता, वह और मजाक करती । ज्यो-ज्यो ध्यान हटाता वैश्या और छेड़ती ।

 
                       एक दिन फरीद साहिब ने उस शिष्य से कहा कि आग चाहिए । उस जमाने में लोग अंगारों को राख में दबा कर रखते थे,और जब आग की जरूरत पड़ती तो अंगारों को निकालकर इस्तेमाल कर लेते, उसने गली व मोहल्ला में पूछा, बहुत घुमा लेकिन आग ना मिली, बाजार में गया, देखा कि वह वैश्या हुक्का पी रही है | अब सोचता है कि उसकी मुझसे पहले ही दुश्मनी है | पर पीर का हुक्म है | ऊपर मकान पर चढ गया | वैश्या ने उसे देखकर पूछा कि क्या बात है ? वह बोला,''माई जी !आग चाहिए |''वह मजाक के साथ कहने लगी कि आग की कीमत आंख है | आंख निकाल कर दे जाओ और आग ले जाओ |

                        उसने फौरन अंगुली डालकर आंख निकाल कर आगे रख दी, वैश्या डर गई,''और आग दे दी। मन में सोचने लगी, मैंने तो मजाक में कहा था। खैर वह पट्टी बांधकर फरीद साहिब के पास आ गया ।

उन्होंने पूछा, आग ले आए हो? जवाब दिया,हा हजूर, ले आया हूं। फरीद साहिब ने कहा कि यह आंख पर पट्टी क्यों बांधी है ?बोला 'आंख' आई हुई है और दुखती है । उन्होंने कहा, ''अगर आई हुई है तो पट्टी खोल दो।'' जब पट्टी खोली तो पहले की तरह सही सलामत थी।

मालिक हमेशा अपने भक्तों की लाज रखता है।


जानबूझकर कभी ग़लती ना करे !


मांगते से क्या मांगना
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            एक बार अकबर बादशाह आगरा के आस-पास के गांव में घुड़ सवारी करता-करता सैर को निकला।download+%2827%29.jpg जब उसे भूख लगी तो एक जमींदार की कुएं पर चला गया। उसने मामूली सवार समझकर बादशाह को कुछ खाने-पीने को दिया और उसे आराम देने का यत्न किया।                  乄乄乄乄 
        अकबर जाते समय उससे बोला,'' देख चौधरी! मैं बादशाह हूं। अगर तुम्हें कोई काम पड़े तो मेरे पास आ जाना। मुझे तुम्हारी मदद करके खुशी मिलेगी, "उसने कहा,"मुझे क्या काम करना है? ज़मीन का लगान तो हम अदा कर ही रहे हैं।
                         "बादशाह चला गया। मालिक की कुछ ऐसी मौज़ हुई कि जमींदार को कोई काम पड़ गया । उसने सोचा कि बादशाह मेरी समस्या का हल ज़रूर निकलेगा । शहर में गया, बादशाह को खबर करवाई । बादशाह ने उसे अंदर बुला लिया ।
                    उस समय बादशाह नमाज़ पढ़ रहे थे, नमाज़ के बाद बादशाह ने हाथ उठाकर दुआ मांगी । चौधरी सब कुछ देख रहा था । जब बादशाह नमाज़ से फारीग हुआ तो जमींदार को देख कर उसका स्वागत किया और पूछा कि कैसे आना हुआ?
 
                       जमींदार ने अजीज़ से पूछा कृपया,"मुझे बताएँगे कि आप क्या कर रहे थे ? बादशाह ने कहा कि ख़ुदा से दुआ मांग रहा था,कि मेरा अमुक काम हो जाए, मेरे राज्य में शांति रहे,वगैरह-वगैरह। 
 
                            यह सुनकर जमींदार ने कहा, "धन्यवाद ! मैं जाता हूं।' बादशाह ने पूछा, "क्यों क्या बात है? तुम किसी काम के लिए नहीं आए थे? "कहने लगा आया तो था, पर मैं भी उसी से मांग लूँगा जिससे आप मांगते हो !
                           बेशक आप बादशाह है, पर मैंने देखा है कि आप भी मांगते हैं।
 
                                मांगने वालो से क्या मंगा, ये तो शर्म कि बाय है,अगर मांगना ही तो परमात्मा से मांगना चाहिए।
 किसी भी जॉब,कोई भी काम,जिसमे आपको हल्का भी सक हो तो आप उसे पैसे मत दो,पहले काम पक्का हो जाये तभी दो वरना मत दो !
 
 
 
 

कौन सा बिजनेस करूं ?

ऐसे बहुत सारे सवाल मेरे मन में खुद आते हैं कि मैं अभी कौन सा बिजनेस शुरू करूं l
अगर Sochu ga तो सोचता ही रह जाऊंगा क्योंकि मुझे टीवी, मोबाइल, रेडियो, टेप रिकॉर्डर ,पंखा, कंप्यूटर, ऐसे कई सारे गैजेट हैं जिसको मैं बना सकता हूं l जिसके समान में चेंज कर सकता हूं l
मेरे को बचपन से ही कई सारे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को ठीक करना , वायरिंग करना;
मैं शुरू से ही करते आ रहा हूं और अब इसके जमाने के हिसाब से अगर मैं इन्हीं सब चीजों में फंसा रहूंगा तो कभी आगे प्रोसेस नहीं कर पाऊंगा l
उसके लिए मुझे बहुत सारा टाइम लग जाएगा l इसके लिए मैं अपने बिजनेस को और आगे नई बिजनेस को सीखने का प्रयास करता हूं और आगे आने वाले कौन सी बिजनेस हो सकती है उसे नजर में रखते हुए अपने कदम को बढ़ाता जाता हूं l

 follow me and I will follow back

यह कहने में और करने में बहुत फर्क होता है l कोई इसी में रह जाता है, कोई आगे बढ़ जाता है और कोई आगे बढ़ कर फिर से रुक जाता है l इसमें कई सारे धारणाएं हैं जो आप अपने दिमाग से इसे सोच कर समझ कर चल सकते हैं l
आने वाले क्या चीजें हैं आप उसे देख कर उसके साथ में बिजनेस करने का डील फाइनल कीजिए और ज्यादातर समय उसी में लगाइए l
मैं सौ बात की एक बात कहूंगा ☆
जैसे आप मोबाइल में गेम खेलते हो और जब आप कोई और काम कर रहे होते हो तो आपका दिमाग उस गेम की तरफ चला जाता है और आप उस काम को करते- करते गेम पर भी आपका दिमाग काम करता है l
उसी प्रकार से किसी भी बिजनेस में आप जाएंगे तो आपका दिमाग वहां चल ही जाएगा l
तो फिर क्या आप किसी भी चीज को हासिल कर लीजिए और किसी भी काम में चले जाइए l आपका दिमाग वहां चला ही जाएगा आपको कुछ समझ आ ही जाएगा l
आप कर ही लोगे लेकिन करना भाई दिल से जो भी करना वरना बाद में मुझे मत कहना कि भैया आपने ही तो कहा था करने को, आज फेल हो गया हूं ¿¿
अरे बेवकूफ फेल नहीं उस फेल से कुछ सीखो और आगे बढ़ो और क्या l

If you do not have the courage to speak, it can be explained by gesture.

Yes you heard right on 98.3 Mirchi Radio FM.
Now what is there to say, if you are determined to say, then you can explain in any way. The gesture is enough to explain, gestures can do everything. By seeing your logo, your body's activity will understand what kind of member you are?

Don't give up इन बिजनेस

The number of times I gave up in my business, I learned more than that business how this business is. How much profit is there, how much is the savings? This whole detail is known, this is called success. There is a difference of understanding.,.,.,.
Since when has life started, where is it going to end, nobody has ever known till date; Even then, in the darkness, they continue to shoot arrows, 'Somewhere, you will either get targeted or will learn to shoot. With this thinking, every human being moves all the time, in the hope that I will definitely get the destination one day or the other. Everyone gets some people stay in the middle, some people learn from that 'Some people go ahead and present themselves. This is the name of life, what else ??
https://www.youtube.com/watch?v=dRb_4xJruPw
Now start this youtube chennel,But i didn't focus much.
Every man walks all the time to present himself. It is also called "running." If you can't get round, learn to walk, if you can walk, learn to creep, if you can crawl, learn to swim. Take it, just keep moving forward.
Business can be small or big business- business and the owner of the business is the one who is going to do it.
Low Business
High Business

Low profit High profit its no metter but matter is I am owner this company.
If I tell the story of my business to you, then you will just sit with your hands on your forehead. Dude, that's why I don't want to see you guys sit, you guys also work and do your names. (Those who say clearly do not live in a hurry) It says that the name of Vikrant - must have been heard or not, if you have heard it, see what is written in front of you, read it and what .....

Thank you, Say that this Blogs__




 https://www.instagram.com/vikrantkumarjha/?hl=hi

मंगलवार, 27 अगस्त 2019

देखने वालों ने तो क्या-क्या नहीं देखा

⤪  मालिक सब देखता है  ⤭

     ऐसा कोई स्थान नहीं जहां मालिक नहीं है । तेरी बादशाहत से कहां जाऊँ ? तेरी हजूरी से भाग कर कहां जाऊँ ? यदि मैं आसमानों पर चढ़ जाऊँ,तू वहां भी मौजूद है। यदि पाताल में अपना डेरा तान लूं  तो  वहां भी तू है ।"
          किसी महात्मा के पास दो आदमी नाम लेने आए। उसमें से एक अधिकारी था, दूसरा अनाधिकारी; महात्मा कमाई वाले थे। उन्होंने दोनों को एक-एक बटेर 🐦 दे दिया और कहा कि जाओ, इनको उस जगह जाकर मार लाओ, जहां कोई और ना देखें। उनमें से एक तो झट से पेड़ की ओट में जाकर बटेर को मार कर ले आया ।
https://www.google.co.in/url?sa=i&source=images&cd=&cad=rja&uact=8&ved=2ahUKEwiHt9rirKPkAhVhl48KHaGrBQUQjB16BAgBEAM&url=http%3A%2F%2Fwildliferemovalusa.com%2Fbird-kill.html&psig=AOvVaw2EmLL4Qp0yhWZ1j3pIF2gW&ust=1567005564148238
मैं Online Business भी करता हूँ ,आप शांति से इस पेज को भी देख सकते है। जो दूसरा था वह उजार में चला गया।
     अब वह सोचता है कि जब मैं इसे मारता हूं तो यह मुझे देखता है और मैं इसे देखता हूं। तब तो हम दो हो गए तीसरा परमेश्वर देखता है, मगर महात्मा का हुक्म था इसे वहां मारो जहां कोई ना देखें । आखिर सोच - सोच कर बटेर को महात्मा के पास ले आया और बोला कि महात्मा जी मुझे तो ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहां कोई ना देखता हो?곧 क्योंकि मालिक हर जगह मौजूद है। महात्मा ने कहा, मैं तुझे नाम दूंगा और दूसरे से कहा, जाओ, अपने
 घर ! 
इसीलिए अगर मालिक को हर जगह हाज़िर-नाज़िर समझें, तो हम कोई एब, पाप या बुरा काम ना करें ।

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रविवार, 25 अगस्त 2019

जिंदगी के प्यास, करनी है पुड़ी आस


⇛ पपीहे का प्रण ⇚

          एक दिन कबीर साहिब गंगा के किनारे घूम रहे थे । उन्होंने देखा कि एक पपीहा
https://www.google.co.in/url?sa=i&source=images&cd=&cad=rja&uact=8&ved=2ahUKEwi8mPuf7Z3kAhUxILcAHczTA8kQjB16BAgBEAM&url=https%3A%2F%2Fcommons.wikimedia.org%2Fwiki%2FFile%3ACommon_Hawk_Cuckoo_(Hierococcyx_varius)_on_a_Banana_leaf_at_Narendrapur_W_IMG_4096.jpg&psig=AOvVaw30c0FGNGIRktUBNIGQohFl&ust=1566816666237693Z_ExjQ1ZK90/XWJohLeiYtI/AAAAAAAALLc/3xvbbnap_10qodJP0ONctHMnQMrruV9cgCLcBGAs/s320/Common_Hawk_Cuckoo_%2528Hierococcyx_varius%2529_on_a_Banana_leaf_at_Narendrapur_W_IMG_4096.jpg" title="पपीहा" width="320" />
प्यास से निढाल होकर नदी में गिर गया है। पपीहा स्वाति - बूंद के अलावा दूसरा पानी नहीं पीता । उसके आस-पास चाहे दरिया, समुद्र, कुएँ तालाब भरे-पड़े हो और पपीहे को कितनी ही प्यास क्यों ना लगी हो, वह  मरना मंज़ूर करेगा, लेकिन किसी दूसरे पानी से अपनी  प्यास नहीं बुझायेगा ।

मैं Online Business भी करता हूँ ,आप शांति से इस पेज को भी देख सकते है।
https://www.youtube.com/watch?v=Cjt_EKY12tk
 कबीर साहिब ने देखा कि सख़्त गर्मी पड़ रही है और प्यास से तड़पता हुआ पपीहा नदी में गिरा पड़ा है, मगर नदी के पानी के लिए उसने अपनी चोच ना खोली। उसे देखकर कबीर साहिब ने कहा कि जब मैं इस छोटी - सी पपीहे की स्वाति बूंद के प्रति भक्ति और निष्ठा देखता हूं कि वह जान देनेे को तैयार है लेकिन नदी का पानी पीने को तैयार नहीं, तो मुझे सतगुरु के प्रति अपनी भक्ति तुच्छ लगने लगती है:

अगर शिष्य के हृदय में परमात्मा सतगुरु के प्रति पपीहे जैसी तीव्र लगन और प्रेम हो, तो वह बहुत जल्दी ऊँचे रूहानी मंडलों में पहुंच जाए ।
https://www.google.co.in/url?sa=i&source=images&cd=&cad=rja&uact=8&ved=2ahUKEwiv7Jes7Z3kAhUgH7cAHVeHD6wQjB16BAgBEAM&url=https%3A%2F%2Fcommons.wikimedia.org%2Fwiki%2FFile%3ACommon_Hawk_Cuckoo_(Hierococcyx_varius)_at_Narendrapur_W_IMG_4111.jpg&psig=AOvVaw30c0FGNGIRktUBNIGQohFl&ust=1566816666237693

गुरुवार, 22 अगस्त 2019

प्रेम ⇝ घृणा

⇜ प्रेम से प्रेम,घृणा से घृणा ⇝

➤परमात्मा प्रेम है। जो प्रेम में डूबा हुआ है, वह परमात्मा में समाया हुआ है, और परमात्मा उसमें समाया हुआ है ।

        कहते हैं एक बार की बात है अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे।
छोटा सा कहानी है,लेकिन एक बात बोले मज़ा आ जायेगा ।मालूम
        कहते हैं एक बार की बात है अकबर बादशाह और बीरबल कहीं जा रहे थे।कुछ फासले पर उन्हें एक जाट आता नजर आया। अकबर बादशाह ने बीरबल से कहा कि इसे देखकर अचानक मेरा मन कहता है कि इसे गोली मार दूँ ।
https://www.google.co.in/url?sa=i&source=images&cd=&cad=rja&uact=8&ved=2ahUKEwihl9OK7pbkAhWIuI8KHc27B8QQjB16BAgBEAM&url=https%3A%2F%2Fpixabay.com%2Fillustrations%2Fgun-guns-pistol-weapon-handgun-3195169%2F&psig=AOvVaw0I8VMrVSHKL8ngAGuue_r_&ust=1566576397463472
देखें इसके दिल💗 में मेरे लिए क्या विचार आते हैं ? जब वह जाट उनके नज़दीक आया तो बीरबल ने बादशाह की ओर इशारा करते हुए उस जाट से पूछा कि भाई डरो नहीं सच - सच बताओ,
मैं Online Business भी करता हूँ ,आप शांति से इस पेज को भी देख सकते है।  जब तेरी नजर इस आदमी पर पड़ी तो तेरे मन में क्या ख्याल आया था ? उस जाट ने कहा कि मेरा दिल चाहता था कि इस आदमी की दाढ़ी खींच लु। इस ख्याल की पुष्टि हो गई कि दिल को दिल से  सीधा‌‌‌‌‌‌‌- राह होती है।


               इसलिए कहते हैं कि अगर शिष्य गुरु को प्यार करेगा तो गुरु भी ज़रूर उसे प्यार करेगा ।
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बुधवार, 21 अगस्त 2019

जरूरी बातों पर ध्यान रखना

सोमवार, 22 जुलाई 2019

इस कहानी मे कही गयी बात सच है,इस कहानी को लिखने का मतलब किसी को ठेस पहूचाना नही है।

⇛⇚ भेड़ में शेर का बच्चा ⇛⇚

रूहानी जीवन व्यतीत करने का उद्देश्य यही है कि मनुष्य माया 
के आवरण से मुक्त होकर स्वयं को पहचान ले कि 
वह आत्मा है जो स्वयं चेतन है तथा महाचेतन के समुद्र का 
अंश है, ताकि वह उस महाचेतन के सागर में मिल जाए । 
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एक बार एक शेरनी,बच्चे को जन्म देकर,शिकार को चली गई। पीछे से, भेड़ चराने वाला, पाली आ गया। उसने बच्चे को उठा लिया और भेड़ का दूध पिला-पिला कर उसे पाल लिया।अब वह बच्चा बड़ा हो गया ।
                        इत्तफाक से एक शेर वहां आ गया। उसने देखा कि,एक शेर का बच्चा भेड़ के साथ घूम रहा है। वह उस शेर के बच्चे के पास गया और कहा कि तू तो शेर 🐯 है"_ बच्चे ने कहा, "नहीं, मैं भेड़👀 हूं।"शेर ने फिर कहा, "नही, तू  शेर है।" शेर के बच्चे ने फिर कहा नहीं,"मैं भेड़ हूं।"उस शेर ने कहा, मेरे साथ नदी 🐬पर चल। जब नदी
 के किनारे पर गए,पानी में अपनी और बच्चे की शक्ल दिखा कर कहा कि देख तेरी और मेरी शक्ल एक जैसी है। शेर का बच्चा कहने लगा, हां ! फिर शेर कहता है, मैं गरजता हूं, तू भी गरज।  शेर गरजा, साथ ही शेर का बच्चा भी गरजा। नतीजा यह हुआ कि भेड़ भी भाग गई और पाली भी भाग गया ।   
असल बात क्या है?

मैं Online Business भी करता हूँ ,आप शांति से इस पेज को भी देख सकते है।
  • यह जो इंद्रियां है ➼ भेड़ हैं ।
  • पाली कौन है ?  ⟶  मन है। 
मन ने इंद्रियों द्वारा इसे भ्रम मे डाल रखा है। जब कभी इसको कोई गुरु 
मिला,उसने कहा, तू आत्मा है और 

 परमात्मा की अंश है। तू अंदर जाकर अपने आप को पहचान और परख । और वह अपने आप को पहचान लेती है और मन और इंद्रियां से मुक्त हो जाती है । 

डू यू अंडरस्टैंड





















हमारे प्यार का खोखलापन

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